श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.112.14 
अनादिष्टस्तु गुरुणा को नु युध्येत मानव:।
आदिष्टस्तु यथा राजन् को न युध्येत मादृश:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! कौन मनुष्य गुरु की आज्ञा के बिना युद्ध करेगा? और गुरु की आज्ञा पाकर भी मेरे जैसा कौन वीर युद्ध नहीं करेगा?॥14॥
 
O Lord! Which man will fight without the permission of his Guru? And after getting the permission of his Guru, which brave man like me will not fight?॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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