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mahabharat 7.112.13: हे राजन! यदि अर्जुन तीन योजन दूर भी चला जाए, तो भी मैं दृढ़ मन से जयद्रथ के मारे जाने से पहले ही अर्जुन के स्थान पर पहुँच जाऊँगा॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.112.13 
त्रियोजनगतस्यापि तस्य यास्याम्यहं पदम्।
आसैन्धववधाद् राजन् सुदृढेनान्तरात्मना॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि अर्जुन तीन योजन दूर भी चला जाए, तो भी मैं दृढ़ मन से जयद्रथ के मारे जाने से पहले ही अर्जुन के स्थान पर पहुँच जाऊँगा॥13॥
 
O King! Even if Arjuna goes three yojanas away, I shall reach Arjuna's place with a strong heart before Jayadratha is killed.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)