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mahabharat 7.112.11: पाण्डु नन्दन अर्जुन से भयभीत होकर मुझे वहाँ पहुँचना है जहाँ जयद्रथ अपनी सेना सहित आश्रय लेकर अश्वत्थामा, कर्ण और कृपाचार्य आदि श्रेष्ठ महारथियों से सुरक्षित खड़ा है॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.112.11 
यत्र सेनां समाश्रित्य भीतस्तिष्ठति पाण्डवात्।
गुप्तो रथवरश्रेष्ठैर्द्रौणिकर्णकृपादिभि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु नन्दन अर्जुन से भयभीत होकर मुझे वहाँ पहुँचना है जहाँ जयद्रथ अपनी सेना सहित आश्रय लेकर अश्वत्थामा, कर्ण और कृपाचार्य आदि श्रेष्ठ महारथियों से सुरक्षित खड़ा है॥11॥
 
Be afraid of Pandu Nandan Arjun, I have to reach where Jayadratha is standing safe from the best charioteers like Ashwatthama, Karna and Kripacharya, taking shelter with his army. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)