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mahabharat 7.112.10: ‘राजन्! जैसे बड़ी मछली समुद्र में प्रवेश करती है, वैसे ही मैं भी क्रोध में आकर द्रोणाचार्य की सेना में प्रवेश करता हूँ। जहाँ राजा जयद्रथ है, वहाँ मैं जाऊँगा॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.112.10 
द्रोणानीकं विशाम्येष क्रुद्धो झष इवार्णवम्।
तत्र यास्यामि यत्रासौ राजन् राजा जयद्रथ:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘राजन्! जैसे बड़ी मछली समुद्र में प्रवेश करती है, वैसे ही मैं भी क्रोध में आकर द्रोणाचार्य की सेना में प्रवेश करता हूँ। जहाँ राजा जयद्रथ है, वहाँ मैं जाऊँगा॥ 10॥
 
‘King! Just as a great fish enters the ocean, in the same way I too, in anger, enter the army of Dronacharya. I will go where King Jayadratha is.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)