श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  7.110.94-95h 
भीष्मद्रोणावतिक्रम्य सर्वयुद्धविशारदम्॥ ९४॥
त्वामेव पुरुषव्याघ्रं लोके सन्त: प्रचक्षते।
 
 
अनुवाद
इस संसार में भीष्म और द्रोण के बाद केवल आप सिंह-पुरुष सात्यकि ही महापुरुषों द्वारा सम्पूर्ण युद्धकला में निपुण माने जाते हैं ॥94 1/2॥
 
In this world, after Bhishma and Drona, only you, the lion-man Satyaki, are considered by the great men to be adept in the complete art of war. ॥ 94 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)