श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 109: घटोत्कचद्वारा अलम्बुषका वध और पाण्डव-सेनामें हर्ष-ध्वनि  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  7.109.32-33 
तावकाश्च हतं दृष्ट्वा राक्षसेन्द्रं महाबलम्॥ ३२॥
अलम्बुषं तथा शूरा विशीर्णमिव पर्वतम्।
हाहाकारमकार्षुश्च सैन्यानि भरतर्षभ॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! टूटे हुए पर्वत के समान महाबली राक्षसराज अलम्बुष को मारा गया देखकर आपके वीर योद्धा और उसकी समस्त सेनाएँ व्याकुल होकर हाहाकार करने लगीं॥32-33॥
 
O best of the Bharatas! Seeing the mighty demon king Alambusha, who was like a broken mountain, being killed, your valiant warriors and all his armies began to cry in distress. ॥ 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)