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mahabharat 7.109.13-14h: उसने अपने भयंकर धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर, जो इन्द्र के वज्र के समान भयंकर ध्वनि करता था, भीमसेन पर पच्चीस बाण और उसके पुत्र घटोत्कच पर पाँच बाण छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.109: घटोत्कचद्वारा अलम्बुषका वध और पाण्डव-सेनामें हर्ष-ध्वनि   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 109: घटोत्कचद्वारा अलम्बुषका वध और पाण्डव-सेनामें हर्ष-ध्वनि  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.109.13-14h 
स विस्फार्य धनुर्घोरमिन्द्राशनिसमस्वनम्॥ १३॥
मारुतिं पञ्चविंशत्या भैमसेनिं च पञ्चभि:।
 
 
अनुवाद
उसने अपने भयंकर धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर, जो इन्द्र के वज्र के समान भयंकर ध्वनि करता था, भीमसेन पर पच्चीस बाण और उसके पुत्र घटोत्कच पर पाँच बाण छोड़े।
 
Stringing his fearsome bow, which made a loud sound like Indra's thunderbolt, he shot twenty-five arrows at Bhimasena and five at his son Ghatotkacha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)