श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 108: द्रौपदीपुत्रोंके द्वारा सोमदत्तकुमार शलका वध तथा भीमसेनके द्वारा अलम्बुषकी पराजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.108.11 
तच्छिरो न्यपतद् भूमौ तपनीयविभूषितम्।
भ्राजयत् तं रणोद्देशं बालसूर्यसमप्रभम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सोमदत्त के पुत्र का स्वर्ण-मंडित सिर प्रातःकालीन सूर्य के समान चमकता हुआ पृथ्वी पर गिर पड़ा, जिससे युद्धभूमि प्रकाशित हो गई।
 
The golden-adorned head of Somadatta's son, shining like the morning sun, fell on the earth, illuminating the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)