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mahabharat 7.106.43-44h: हे प्रभु! उन्हें रथहीन और विशेषकर अस्त्रहीन देखकर द्रोणाचार्य ने शत्रुओं और उनकी समस्त सेनाओं को मोहित कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  7.106.43-44h 
विरथं तं समालोक्य व्यायुधं च विशेषत:॥ ४३॥
द्रोणो व्यमोहयच्छत्रून् सर्वसैन्यानि वा विभो।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उन्हें रथहीन और विशेषकर अस्त्रहीन देखकर द्रोणाचार्य ने शत्रुओं और उनकी समस्त सेनाओं को मोहित कर लिया।
 
O Lord! Seeing them without chariot and especially without weapons, Dronacharya mesmerized the enemies and their entire armies. 43 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)