Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.106.38-39h: हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजन! उस गदा को सहसा अपनी ओर आता देख, क्रोध में भरे हुए युधिष्ठिर ने गदा उठाकर द्रोणाचार्य पर फेंकी। 38 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.106.38-39h 
तामापतन्तीं सहसा गदां दृष्ट्वा युधिष्ठिर:॥ ३८॥
गदामेवाग्रहीत् क्रुद्धश्चिक्षेप च परंतप।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजन! उस गदा को सहसा अपनी ओर आता देख, क्रोध में भरे हुए युधिष्ठिर ने गदा उठाकर द्रोणाचार्य पर फेंकी। 38 1/2
 
O King who torments his enemies! Seeing that mace coming towards him suddenly, Yudhishthira filled with rage picked up the mace and threw it at Dronacharya. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)