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mahabharat 7.106.30: हे भारत! उसे मारकर पराक्रमी युधिष्ठिर हर्ष से भर गए और उन्होंने जोर से गर्जना की। उस गर्जना से उन्होंने समस्त प्राणियों में भय उत्पन्न कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.106.30 
समुत्क्षिप्य च तां हृष्टो ननाद बलवद् बली।
नादेन सर्वभूतानि त्रासयन्निव भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! उसे मारकर पराक्रमी युधिष्ठिर हर्ष से भर गए और उन्होंने जोर से गर्जना की। उस गर्जना से उन्होंने समस्त प्राणियों में भय उत्पन्न कर दिया।
 
Bharat! After killing him, the powerful Yudhishthira was filled with joy and roared loudly. With that roar he instilled fear in all creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)