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mahabharat 7.106.2: संजय कहते हैं - उस दिन मध्यान्ह के समय जब घमासान युद्ध चल रहा था, तब पांचालों और कौरवों में द्रोणाचार्य को दांव पर लगाकर एक प्रकार का जुआ खेलने का खेल शुरू हो गया।॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.106.2 
संजय उवाच
अपराह्णे महाराज संग्रामे लोमहर्षणे।
पञ्चालानां कुरूणां च द्रोणद्यूतमवर्तत॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - उस दिन मध्यान्ह के समय जब घमासान युद्ध चल रहा था, तब पांचालों और कौरवों में द्रोणाचार्य को दांव पर लगाकर एक प्रकार का जुआ खेलने का खेल शुरू हो गया।॥ 2॥
 
Sanjaya says: On that day, in the afternoon, when the thrilling battle was going on, a kind of gambling began between the Panchalas and the Kauravas, with Dronacharya at stake.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)