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mahabharat 7.106.14: वहाँ व्याघ्रदत्त ने अपने अत्यंत तीखे बाणों द्वारा शत्रु सेना को बार-बार हिलाकर नरसिंह सात्यकि को आगे बढ़ने से रोक दिया ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 106: द्रोण और उनकी सेनाके साथ पाण्डव-सेनाका द्वन्द्वयुद्ध तथा द्रोणाचार्यके साथ युद्ध करते समय रथ-भंग हो जानेपर युधिष्ठिरका पलायन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.106.14 
सात्यकिं तु नरव्याघ्रं व्याघ्रदत्तस्त्ववारयत्।
शरै: सुनिशितैस्तीक्ष्णै: कम्पयन् वै मुहुर्मुहु:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ व्याघ्रदत्त ने अपने अत्यंत तीखे बाणों द्वारा शत्रु सेना को बार-बार हिलाकर नरसिंह सात्यकि को आगे बढ़ने से रोक दिया ॥14॥
 
There Vyaghradatta, by repeatedly shaking the enemy army with his extremely sharpened arrows, prevented the man-lion Satyaki from advancing. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)