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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय
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श्लोक 9
श्लोक
7.103.9
विस्मयो मे महान् पार्थ तव दृष्ट्वा शरानिमान्।
व्यर्थान् निपतितान् संख्ये दुर्योधनरथं प्रति॥ ९॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! आज युद्धभूमि में दुर्योधन के रथ के पास आपके बाण निष्फल पड़े देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा है।
O son of Kunti! I am very surprised to see your arrows lying ineffective near Duryodhan's chariot on the battlefield today.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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