आपके योद्धा कवचधारी महाबली श्रीकृष्ण और अर्जुन को आते देखकर क्रोधित होकर उनकी ओर दौड़े। यह बड़ी आश्चर्यजनक बात थी ॥49॥
Your warriors, wearing armor, seeing the mighty Krishna and Arjuna approaching, became angry and ran towards them. This was an astonishing thing. ॥ 49॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि दुर्योधनपराजये त्र्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १०३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें दुर्योधन-पराजयविषयक एक सौ तीनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ५० श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥