श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.103.47 
स शब्दो भरतश्रेष्ठ व्याप्य सर्वा दिशो दश।
प्रतिसस्वान तत्रैव कुरुपाण्डवयोर्बले॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वह ध्वनि दसों दिशाओं में फैल गई और कौरव-पाण्डव सेनाओं में गूंजती रही।
 
O best of the Bharatas! That sound spread in all the ten directions and kept echoing in the Kaurava and Pandava armies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)