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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय
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श्लोक 45
श्लोक
7.103.45
तं श्रुत्वा निनदं घोरं तावकानां समुत्थितम्।
प्रदध्मतु: शङ्खवरौ वासुदेवधनंजयौ॥ ४५॥
अनुवाद
आपकी सेना का भयंकर कोलाहल सुनकर श्रीकृष्ण और अर्जुन ने अपने श्रेष्ठ शंख बजाए ॥45॥
Hearing the dreadful uproar made by your troops, Sri Krishna and Arjuna blew their best conches. ॥45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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