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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय
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श्लोक 42
श्लोक
7.103.42
तैर्विमुक्तो रथो रेजे वाय्वीरित इवाम्बुद:।
जयद्रथस्य गोप्तारस्तत: क्षुब्धा: सहानुगा:॥ ४२॥
अनुवाद
उनकी घेराबंदी से मुक्त होकर, अर्जुन का रथ हवा से उड़ते बादल जैसा लग रहा था। इससे जयद्रथ के रक्षक और सेवक व्याकुल हो गए।
Freed from their siege, Arjuna's chariot looked like a wind-driven cloud. This agitated Jayadratha's protectors and servants.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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