श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.103.31 
दुर्योधनं च बाणाभ्यां तीक्ष्णाभ्यां विरथीकृतम्।
आविध्यद्धस्ततलयोरुभयोरर्जुनस्तदा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस समय पार्थ ने दो तीखे बाणों से रथहीन दुर्योधन की दोनों हथेलियों पर गहरा घाव कर दिया।
 
At that time Partha inflicted deep wounds on both the palms of Duryodhana, who was left chariotless, with two sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)