श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.103.30 
धनुरस्याच्छिनत् तूर्णं हस्तावापं च वीर्यवान्।
रथं च शकलीकर्तुं सव्यसाची प्रचक्रमे॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वीर अर्जुन ने बड़े पराक्रम से तुरन्त ही उसका धनुष और दस्ताने काट डाले और रथ को टुकड़े-टुकड़े करने लगे ॥30॥
 
Thereupon the valiant Arjuna, with great valour, immediately cut off his bow and gloves and began tearing the chariot into pieces. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)