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mahabharat 7.103.26-27: उसने युद्धभूमि में बाणों की वर्षा करके श्रीकृष्ण और पांडवपुत्र धनंजय पर पुनः बाण बरसाए। इससे आपके सैनिक अत्यंत प्रसन्न हुए और बाण बजाने तथा गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  7.103.26-27 
भूय एवाभ्यवर्षच्च समरे कृष्णपाण्डवौ॥ २६॥
शरवर्षेण महता ततोऽहृष्यन्त तावका:।
चक्रुर्वादित्रनिनदान् सिंहनादरवांस्तथा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उसने युद्धभूमि में बाणों की वर्षा करके श्रीकृष्ण और पांडवपुत्र धनंजय पर पुनः बाण बरसाए। इससे आपके सैनिक अत्यंत प्रसन्न हुए और बाण बजाने तथा गर्जना करने लगे।
 
He showered arrows on the battlefield and again showered arrows on Shri Krishna and Pandava's son Dhananjay. This made your soldiers very happy. They started playing musical instruments and roaring.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)