श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.103.20-21h 
पुनर्ददौ सुरपतिर्मह्यं वर्म ससंग्रहम्।
दैवं यद्यस्य वर्मैतद् ब्रह्मणा वा स्वयं कृतम्॥ २०॥
नैनं गोप्स्यति दुर्बुद्धिमद्य बाणहतं मया।
 
 
अनुवाद
तब देवराज इन्द्र ने मुझे वह कवच विधि और रहस्य सहित दे दिया। दुर्योधन का यह कवच यदि देवताओं द्वारा अथवा स्वयं ब्रह्मा द्वारा भी निर्मित किया जाए, तो भी वह आज मेरे बाणों से मारे गए इस दुष्टबुद्धि दुर्योधन को नहीं बचा सकेगा।
 
Then Devraj Indra gave me that armour along with its method and secret. Even if this armour of Duryodhan is made by the gods or by Brahma himself, it will not be able to save this evil-minded Duryodhan who has been killed by my arrows today. 20 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)