श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.103.16 
एष दुर्योधन: कृष्ण द्रोणेन विहितामिमाम्।
तिष्ठत्यभीतवत् संख्ये बिभ्रत् कवचधारणाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे श्रीकृष्ण! द्रोणाचार्य द्वारा विधिपूर्वक धारण कराए गए इस कवच को धारण करके दुर्योधन युद्धभूमि में निर्भय होकर खड़ा है।
 
Sri Krishna! Wearing this armor which was duly made to wear by Dronacharya, Duryodhan is standing fearlessly on the battlefield. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)