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mahabharat 7.103.14-15: श्रीकृष्ण! यह सब जानते हुए भी आप मुझे कैसे भ्रमित कर रहे हैं? केशव! तीनों लोकों में जो कुछ हुआ है, जो कुछ हो रहा है और जो कुछ भविष्य में होने वाला है, यह सब आप जानते हैं। मधुसूदन! यह बात आपसे अधिक अच्छी तरह कोई नहीं जानता॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 7.103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.103.14-15 
जानंस्त्वमपि वै कृष्ण मां विमोहयसे कथम्।
यद् वृत्तं त्रिषु लोकेषु यच्च केशव वर्तते॥ १४॥
तथा भविष्यद् यच्चैव तत् सर्वं विदितं तव।
न त्विदं वेद वै कश्चिद् यथा त्वं मधुसूदन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! यह सब जानते हुए भी आप मुझे कैसे भ्रमित कर रहे हैं? केशव! तीनों लोकों में जो कुछ हुआ है, जो कुछ हो रहा है और जो कुछ भविष्य में होने वाला है, यह सब आप जानते हैं। मधुसूदन! यह बात आपसे अधिक अच्छी तरह कोई नहीं जानता॥14-15॥
 
Shri Krishna! How are you misleading me even after knowing all this? Keshav! Whatever has happened in the three worlds, whatever is happening and whatever is going to happen in future, all this is known to you. Madhusudan! No one else knows this as well as you do.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)