श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.103.12 
अस्मिन्नन्तर्हितं कृष्ण त्रैलोक्यमपि वर्मणि।
एको द्रोणो हि वेदैतदहं तस्माच्च सत्तमात्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! इस कवच में तीनों लोकों की शक्ति समाहित है। इस ज्ञान को केवल आचार्य द्रोण ही जानते हैं और मैं भी उन्हीं सद्गुरु से सीखकर इसे सीख पाया हूँ॥12॥
 
Shri Krishna! This armor contains the power of the three worlds. Only Acharya Drona knows this knowledge and I too have been able to learn it by learning it from the same Sadguru.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)