अर्जुन उवाच
द्रोणेनैषा मति: कृष्ण धार्तराष्ट्रे निवेशिता।
अभेद्या हि ममास्त्राणामेषा कवचधारणा॥ ११॥
अनुवाद
अर्जुन बोले - "श्रीकृष्ण! मेरा विश्वास है कि द्रोणाचार्य ने दुर्योधन को अभेद्य कवच पहनाकर उसमें यह अद्भुत शक्ति स्थापित कर दी है। यह कवच मेरे अस्त्रों के लिए अभेद्य है।"
Arjun said - Shri Krishna! I believe that Dronacharya has installed this amazing power in Duryodhan by making him wear an impenetrable armor. This armor is impenetrable to my weapons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥