श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.101.33 
शौरेरभीषुहस्तस्य पार्थस्य च धनुष्मत:।
तयोरासीत् प्रभा राजन् सूर्यपावकयोरिव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजन! हाथ में लगाम पकड़े हुए श्रीकृष्ण और धनुष धारण किए हुए अर्जुन - उन दोनों की चमक सूर्य और अग्नि के समान प्रतीत हो रही थी॥33॥
 
Rajan! Shri Krishna holding the reins in his hands and Arjun holding the bow - the glow of both of them seemed like the sun and fire. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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