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श्लोक 7.101.17  |
यद्यस्य समरे गोप्ता शक्रो देवगणै: सह।
तथाप्येनं निहंस्याव इति कृष्णावभाषताम्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| यदि युद्धस्थल में समस्त देवताओं सहित स्वयं इन्द्र भी उसकी रक्षा करें, तो भी हम दोनों उसे अवश्य मार डालेंगे।’ इस प्रकार दोनों कृष्ण आपस में बातें कर रहे थे॥17॥ |
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| Even if Indra himself along with all the gods protect him in the battlefield, we both will certainly kill him.' In this manner both Krishnas were talking to each other.॥ 17॥ |
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