श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.101.16 
असौ मध्ये कृत: षड्‍‍भिर्धार्तराष्ट्रैर्महारथै:।
चक्षुर्विषयसम्प्राप्तो न मे मोक्ष्यति सैन्धव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि धृतराष्ट्र के छह महाबली पुत्रों ने जयद्रथ को अपने बीच छिपा लिया है, तथापि यदि वह मेरी दृष्टि में आ जाए तो मेरे हाथ से जीवित बचकर नहीं निकल सकेगा॥16॥
 
Although the six mighty sons of Dhritarashtra have hidden Jaydrath amongst themselves, yet if I catch sight of him I will not be able to escape alive from my hands.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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