श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  7.100.23-24 
तौ प्रयातौ पुनर्दृष्ट्वा तदान्ये सैनिकाब्रुवन्।
त्वरध्वं कुरव: सर्वे वधे कृष्णकिरीटिनो:॥ २३॥
रथयुक्तो हि दाशार्हो मिषतां सर्वधन्विनाम्।
जयद्रथाय यात्येष कदर्थीकृत्य नो रणे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उन्हें पुनः आगे बढ़ते देख अन्य सैनिकों ने कहा, "कौरवों! तुम सब लोग शीघ्रतापूर्वक श्रीकृष्ण और अर्जुन को मार डालने का प्रयत्न करो। इस रणभूमि में रथ पर बैठे हुए श्रीकृष्ण हम सब धनुर्धरों के सामने ही हमारी उपेक्षा करके जयद्रथ की ओर बढ़ रहे हैं।" ॥23-24॥
 
Seeing them moving ahead again, the other soldiers said, "Kauravas! All of you should try quickly to kill Shri Krishna and Arjun. Sitting on a chariot in this battlefield, Shri Krishna is ignoring us and moving towards Jayadratha in front of all of us archers." ॥23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)