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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना
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श्लोक 14
श्लोक
7.100.14
तेषां श्रमं च ग्लानिं च वमथुं वेपथुं व्रणान्।
सर्वं व्यपानुदत् कृष्ण: कुशलो ह्यश्वकर्मणि॥ १४॥
अनुवाद
घोड़ों की चिकित्सा करने में कुशल श्रीकृष्ण ने उनके सारे कष्ट दूर कर दिए - परिश्रम, थकान, उल्टी, कम्पन और घाव ॥14॥
Sri Krishna, who was skilled in treating horses, relieved them of all their sufferings - exertion, fatigue, vomiting, tremors and wounds. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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