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mahabharat 7.10.68-69: एकमात्र उशीनर के पौत्र शैब्य के अतिरिक्त स्थावर-जंगम तीनों लोकों में न तो इस समय हम किसी अन्य राजा को उत्पन्न होते देखते हैं और न भविष्य में भी किसी ऐसे उत्पन्न होने का कोई लक्षण ही देखते हैं जो इस महान भार को वहन कर सके। इस मृत्युलोक में रहने वाले मनुष्य उनकी गति को समझ नहीं सकेंगे। 68-69॥   |   mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 68-69
 
 
श्लोक  7.10.68-69 
पश्यामस्त्रिषु लोकेषु न तं संस्थास्नुचारिषु।
जातं चापि जनिष्यन्तं द्वितीयं चापि साम्प्रतम्॥ ६८॥
अन्यमौशीनराच्छैब्याद् धुरो वोढारमित्युत।
गतिं यस्य न यास्यन्ति मानुषा लोकवासिन:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
एकमात्र उशीनर के पौत्र शैब्य के अतिरिक्त स्थावर-जंगम तीनों लोकों में न तो इस समय हम किसी अन्य राजा को उत्पन्न होते देखते हैं और न भविष्य में भी किसी ऐसे उत्पन्न होने का कोई लक्षण ही देखते हैं जो इस महान भार को वहन कर सके। इस मृत्युलोक में रहने वाले मनुष्य उनकी गति को समझ नहीं सकेंगे। 68-69॥
 
Apart from the only Ushinar's grandson Shaibya, in the three worlds, movable and immovable, neither do we see any other king being born at this time, nor are we able to see any sign of anyone being born in the future, who can bear this great burden. The humans living in this mortal world will not be able to understand their movements. 68-69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)