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mahabharat 7.10.38: जैसे भगवान श्रीकृष्ण में तीनों लोक विद्यमान हैं, वैसे ही सत्य, धैर्य, बुद्धि, पराक्रम और परम ब्रह्मास्त्र सात्वतवंशी सात्यकि में विद्यमान हैं ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.10.38 
सत्यं धृतिर्मति: शौर्यं ब्राह्मं चास्त्रमनुत्तमम्।
सात्वते तानि सर्वाणि त्रैलोक्यमिव केशवे॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जैसे भगवान श्रीकृष्ण में तीनों लोक विद्यमान हैं, वैसे ही सत्य, धैर्य, बुद्धि, पराक्रम और परम ब्रह्मास्त्र सात्वतवंशी सात्यकि में विद्यमान हैं ॥38॥
 
Just as all the three worlds are present in Lord Shri Krishna, in the same way truth, patience, intelligence, bravery and the supreme Brahmastra are present in Satyaki of Satvatvanshi. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)