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mahabharat 6.99.1: संजय कहते हैं - महाराज! तत्पश्चात् शान्तनुनंदन भीष्म अपनी सेना सहित शिविर से बाहर आये। उन्होंने अपनी सेना को सर्वतोभद्र नामक एक विशाल सेना के रूप में संगठित किया॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 6.99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.99.1 
संजय उवाच
तत: शान्तनवो भीष्मो निर्ययौ सह सेनया।
व्यूहं चाव्यूहत महत् सर्वतोभद्रमात्मन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! तत्पश्चात् शान्तनुनंदन भीष्म अपनी सेना सहित शिविर से बाहर आये। उन्होंने अपनी सेना को सर्वतोभद्र नामक एक विशाल सेना के रूप में संगठित किया॥ 1॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Thereafter Shantanu Nandan Bhishma came out of the camp with his army. He organized his army in the form of a great formation called Sarvatobhadra.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)