श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.97.4 
द्रोणो भीष्म: कृप: शल्य: सौमदत्तिश्च संयुगे।
न पार्थान् प्रतिबाधन्ते न जाने तच्च कारणम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मित्रो! द्रोणाचार्य, भीष्म, कृपाचार्य, शल्य और भूरिश्रवा- ये लोग युद्ध में कुंतीपुत्रों को कभी कष्ट नहीं देते। मैं इसका कारण नहीं जानता।
 
Friends! Dronacharya, Bhishma, Kripacharya, Shalya and Bhurishrava-these people never cause any trouble to Kunti's sons in the war. I do not know the reason for this.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd