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श्लोक 6.97.39-40  |
अहं सर्वान् महाराज निहनिष्यामि सोमकान्।
पञ्चालान् केकयै: सार्धं करूषांश्चेति भारत॥ ३९॥
त्वद्वच: सत्यमेवास्तु जहि पार्थान् समागतान्।
सोमकांश्च महेष्वासान् सत्यवाग् भव भारत॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘महाराज! हे भरतपुत्र! मैं केकयों सहित समस्त सोमकों, पांचालों और करुषों का वध करूँगा - आपकी बात सत्य हो। भरत! आप युद्ध में अपने सामने आए हुए कुन्तीपुत्रों और महाधनुर्धर सोमकों का वध करें और ऐसा करके अपनी प्रतिज्ञा सत्य करें।॥ 39-40॥ |
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| ‘Maharaj! O son of Bharata! I shall kill all the Somakas, Panchalas and Karushas along with the Kekayas—may what you say be true. Bharata! You must kill the sons of Kunti and the great archer Somakas who have come before you in the battle and by doing so make your promise true.॥ 39-40॥ |
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