श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 96: इरावान‍्के वधसे अर्जुनका दु:खपूर्ण उद्‍गार, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके नौ पुत्रोंका वध, अभिमन्यु और अम्बष्ठका युद्ध, युद्धकी भयानक स्थितिका वर्णन तथा आठवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.96.25 
तत: सुनिशितान् पीतान् समादत्त शिलीमुखान्।
ससर्ज त्वरया युक्त: पुत्रांस्ते प्राप्य मारिष॥ २५॥
 
 
अनुवाद
आर्य! इसके बाद भीम ने बड़ी शीघ्रता से अपने हाथों में बहुत से तीखे और पानी जैसे बाण लेकर आपके पुत्रों पर निशाना साधकर उन्हें छोड़ दिया।
 
Arya! After this, Bhima very hastily took many sharp and watery arrows in his hands and aimed them at your sons and released them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)