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mahabharat 6.95.76: हे भरतश्रेष्ठ! भीमसेन का सारथि विशोक युद्ध में भगदत्त के द्वारा अत्यन्त घायल हो गया था और वह रथ के पिछले भाग में चुपचाप बैठा रहा।   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  6.95.76 
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत्।
विशोको भरतश्रेष्ठ भगदत्तेन संयुगे॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! भीमसेन का सारथि विशोक युद्ध में भगदत्त के द्वारा अत्यन्त घायल हो गया था और वह रथ के पिछले भाग में चुपचाप बैठा रहा।
 
O best of the Bharatas! Bhimasena's charioteer Visoka was deeply wounded in the battle by Bhagadatta and he sat quietly in the rear of the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)