Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.95.7-8: महाभाग! जैसे अग्नि सूखे वृक्ष को जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही यह अपमान मेरे शरीर के अंगों को जला रहा है। हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले पितामह! आपकी कृपा से मैं स्वयं उस नीच और भयंकर राक्षस का वध करना चाहता हूँ। आपका आश्रय लेकर मैं उस पर विजय पाना चाहता हूँ। अतः आप मेरी यह इच्छा पूर्ण करें।॥ 7-8॥ | mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाभाग! जैसे अग्नि सूखे वृक्ष को जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही यह अपमान मेरे शरीर के अंगों को जला रहा है। हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले पितामह! आपकी कृपा से मैं स्वयं उस नीच और भयंकर राक्षस का वध करना चाहता हूँ। आपका आश्रय लेकर मैं उस पर विजय पाना चाहता हूँ। अतः आप मेरी यह इच्छा पूर्ण करें।॥ 7-8॥
‘Mahabhag! Just as fire burns a dry tree to ashes, similarly this insult is burning my body parts. O grandfather who torments the enemies! With your grace, I want to kill that vile and fierce demon myself. I want to be victorious over him by taking your support. So please fulfill this desire of mine.’॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥