Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.95.49-50h: जैसे वायु अपने बल से वृक्षों को उखाड़ फेंकती है, उसी प्रकार वह हाथी भयंकर स्वर में चिंघाड़ता हुआ और अपनी ही सेना को कुचलता हुआ बड़े वेग से भागा। | mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स प्रदुद्राव वेगेन प्रणदन् भैरवं रवम्॥ ४९॥
सम्मर्दयान: स्वबलं वायुर्वृक्षानिवौजसा।
अनुवाद
जैसे वायु अपने बल से वृक्षों को उखाड़ फेंकती है, उसी प्रकार वह हाथी भयंकर स्वर में चिंघाड़ता हुआ और अपनी ही सेना को कुचलता हुआ बड़े वेग से भागा।
Just as the wind uproots trees with its power, in the same way that elephant ran away with great speed, trumpeting in a terrifying voice and trampling his own army.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥