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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  6.95.48-49h 
स गाढविद्धो व्यथितो नागो भरतसत्तम॥ ४८॥
उपावृत्तमद: क्षिप्रमभ्यवर्तत वेगित:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उन बाणों से वह हाथी अत्यन्त घायल हो गया और व्याकुल हो गया। उसका सारा अभिमान नष्ट हो गया और वह बड़े वेग से पीछे हटने लगा।
 
O best of the Bharatas! The elephant was extremely wounded by those arrows and became distressed. All his pride vanished and he started retreating with great speed. 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)