Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.95.35: जैसे वर्षा ऋतु में बादल पर्वत शिखरों पर जल की धाराएँ बरसाते हैं, उसी प्रकार राजा भगदत्त भीमसेन पर बाणों की वर्षा करके उन्हें कष्ट देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.95.35 
स भीमं शरधाराभिस्ताडयामास पार्थिव:।
पर्वतं वारिधाराभिस्तपान्ते जलदो यथा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में बादल पर्वत शिखरों पर जल की धाराएँ बरसाते हैं, उसी प्रकार राजा भगदत्त भीमसेन पर बाणों की वर्षा करके उन्हें कष्ट देने लगे।
 
Just as during the rainy season, clouds pour down torrents of water on the mountain peaks, similarly King Bhagadatta began tormenting Bhimasena by showering arrows on him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)