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mahabharat 6.95.20: नृपश्रेष्ठ! इस महायुद्ध में घटोत्कच का सामना करने वाले आप ही एकमात्र योद्धा हैं। राजन! आप अपने पराक्रम से पराक्रम प्राप्त करके राक्षसमुख घटोत्कच का वध कर दीजिए। 20॥   |   mahabharat अध्याय 6.95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 95: दुर्योधनके अनुरोध और भीष्मजीकी आज्ञासे भगदत्तका घटोत्कच, भीमसेन और पाण्डव-सेनाके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.95.20 
त्वं तस्य नृपशार्दूल प्रतियोद्धा महाहवे।
स्वबलेनोच्छ्रितो राजञ्जहि राक्षसपुङ्गवम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ! इस महायुद्ध में घटोत्कच का सामना करने वाले आप ही एकमात्र योद्धा हैं। राजन! आप अपने पराक्रम से पराक्रम प्राप्त करके राक्षसमुख घटोत्कच का वध कर दीजिए। 20॥
 
Nrupashrestha! You are the only warrior who faced Ghatotkacha in this great war. Rajan! By your own strength you attain excellence and kill the demon-headed Ghatotkacha. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)