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mahabharat 6.94.41-42h: तत्पश्चात् उस मायावी राक्षसराज ने समरांगण में अश्वत्थामा को मोहित करते हुए एक अत्यन्त भयंकर माया प्रकट की ॥41 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  6.94.41-42h 
प्रादुश्चक्रे ततो मायां घोररूपां सुदारुणाम्॥ ४१॥
मोहयन् समरे द्रौणिं मायावी राक्षसाधिप:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस मायावी राक्षसराज ने समरांगण में अश्वत्थामा को मोहित करते हुए एक अत्यन्त भयंकर माया प्रकट की ॥41 1/2॥
 
After that, that elusive demon king manifested a very dangerous illusion while bewitching Ashwatthama in Samarangana. 41 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)