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mahabharat 6.94.4: तब महारथी दुर्योधन ने इसे उपयुक्त अवसर समझकर उत्सुकतापूर्वक एक तीक्ष्ण बाण चलाया, जो पर्वतों को भी भेदने में समर्थ था।   |   mahabharat अध्याय 6.94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन और भीमसेनका एवं अश्वत्थामा और राजा नीलका युद्ध तथा घटोत्कचकी मायासे मोहित होकर कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.94.4 
तदन्तरं च सम्प्रेक्ष्य त्वरमाणो महारथ:।
प्रसंदधे शितं बाणं गिरीणामपि दारणम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब महारथी दुर्योधन ने इसे उपयुक्त अवसर समझकर उत्सुकतापूर्वक एक तीक्ष्ण बाण चलाया, जो पर्वतों को भी भेदने में समर्थ था।
 
Then, taking it to be a suitable opportunity, the mighty car-warrior Duryodhana eagerly aimed a sharp arrow, capable of piercing even the mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)