श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 9: भारतवर्षकी नदियों, देशों तथा जनपदोंके नाम और भूमिका महत्त्व  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  6.9.31-32 
सुनसां तमसां दासीं वसामन्यां वराणसीम्।
नीलां घृतवतीं चैव पर्णाशां च महानदीम्॥ ३१॥
मानवीं वृषभां चैव ब्रह्ममेध्यां बृहद्धनिम्।
एताश्चान्याश्च बहुधा महानद्यो जनाधिप॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
सुंसा, तमसा, दासी, वासा, वाराणसी, नीला, घृतवती, महानदी पर्णशा, मानवी, वृषभ, ब्रह्ममेध्या, बृहधानी, राजन! ये और कई नदियाँ हैं। 31-32॥
 
Sunsa, Tamsa, Dasi, Vasa, Varanasi, Neela, Ghritvati, Mahanadi Parnasha, Manvi, Vrishabha, Brahmamedhya, Brihadhani, Rajan! These and many other rivers are there. 31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)