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mahabharat 6.87.3-4: नरेश्वर! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन, चित्रसेन, विविंशति, श्रेष्ठ सारथी भीष्म और द्रोणाचार्य, ये सब लोग संगठित होकर सतर्क हो गए और कवच धारण करके पाण्डवों के साथ युद्ध करने के लिए कौरवों की विशाल सेना की व्यूह रचना करने लगे॥3-4॥   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  6.87.3-4 
ततो दुर्योधनो राजा चित्रसेनो विविंशति:।
भीष्मश्च रथिनां श्रेष्ठो भारद्वाजश्च वै नृप॥ ३॥
एकीभूता: सुसंयत्ता: कौरवाणां महाचमूम्।
व्यूहाय विदधू राजन् पाण्डवान् प्रति दंशिता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन, चित्रसेन, विविंशति, श्रेष्ठ सारथी भीष्म और द्रोणाचार्य, ये सब लोग संगठित होकर सतर्क हो गए और कवच धारण करके पाण्डवों के साथ युद्ध करने के लिए कौरवों की विशाल सेना की व्यूह रचना करने लगे॥3-4॥
 
Nareshwar! After that, King Duryodhana, Chitrasena, Vivinshati, the best charioteer Bhishma and Dronacharya, all of them got organized and alert and started putting on armor and forming the array of the huge army of Kauravas to fight with the Pandavas. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)