युध्यतां तु तथा तेषां कुर्वतां कर्म दुष्करम्।
अस्तं गिरिमथारूढे अप्रकाशति भास्करे॥ ४२॥
प्रावर्तत नदी घोरा शोणितौघतरङ्गिणी।
गोमायुगणसंकीर्णा क्षणेन क्षणदामुखे॥ ४३॥
अनुवाद
तब वे सभी योद्धा बड़े वेग से युद्ध करने लगे और अपना पराक्रम दिखाने लगे। उसी समय सूर्य पश्चिम की ओर चला गया और उसका प्रकाश लुप्त हो गया। इस प्रकार संध्या होते-होते रक्त से भरी एक भयानक नदी बहने लगी और उसके तट पर सियारों का समूह एकत्र हो गया। 42-43
Then all those warriors started fighting with great vigour and displayed their valour. At that very moment the sun went to the west and its light vanished. Thus, by the time the evening came, a terrible river full of blood started flowing and a crowd of jackals gathered on its banks. 42-43.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥