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श्लोक 6.84.55  |
तत: प्रवृत्त: सुमहान् संग्राम: शोणितोदक:।
तावकानां च समरे पाण्डवानां च भारत॥ ५५॥ |
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| अनुवाद |
| भारत! तत्पश्चात् आपके पुत्रों और पाण्डवों के बीच युद्धभूमि में रक्त की धारा बहने लगी, जिसमें रक्त की धारा बह रही थी॥55॥ |
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| Bhaarat! Thereafter a great battle broke out on the battlefield between your sons and the Pandavas, with blood flowing like water. ॥ 55॥ |
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इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि सप्तमयुद्धदिवसे सुशर्मार्जुनसमागमे चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें सातवें दिनके युद्धमें सुशर्मा और अर्जुनकी भिड़ंतसे सम्बन्ध रखनेवाला चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥
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