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mahabharat 6.84.5: महामना श्रुतायु के बाणों से घायल होने पर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर अत्यन्त क्रोधित हो उठे और उन्होंने युद्धस्थल में वराहकर्ण नामक बाण चलाकर राजा श्रुतायु की छाती में चोट पहुँचाई ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.84.5 
पाण्डवस्तु भृशं क्रुद्धो विद्धस्तेन महात्मना।
रणे वराहकर्णेन राजानं हृद्यविध्यत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महामना श्रुतायु के बाणों से घायल होने पर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर अत्यन्त क्रोधित हो उठे और उन्होंने युद्धस्थल में वराहकर्ण नामक बाण चलाकर राजा श्रुतायु की छाती में चोट पहुँचाई ॥5॥
 
On being injured by the arrows of Mahamana Shrutayu, Pandunandan Yudhishthir became very angry and he shot an arrow named Varahakarna in the battlefield and hurt King Shrutayu in the chest. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)